Saturday, July 14, 2012

jhooth muth ke sapney झूठ मुठ के सपने

झूठ मुठ के सपने ,
बुरी आदत या बुरी बाला जैसे ,
सच्चे ख्वाब से मन में परिंदे उढ़ते है ,
झूठे ख्वाब सिर्फ दिन में जुगनू दिखाते है ,
पहचाने ना जाने तक दोनों सपने ही अपने लगते है ..


यूँ तो सपने जब टूटते है खुद को बहलाने की वजह  नहीं मिलती ,
पर झूठे सपनों से जब पर्दा उठता है
तो खुद को छुपाने की जगह नहीं मिलती ..


रंग - बेरंगी सी सपने ,
मीठे - नमकीन सी सपने ,
अपने - बेगाने से सपने ,
जाने - अनजाने से सपने ,
किसी भी नगमे की देखो सपने ,
अपने आपको मिलाओ सपनों की ताल से ,
बस दूर रहो उस मिलावटी सपनों से ,
जो लगे तो अछे पर है झूठ से सजे .....


Jhooth muth ke sapney ,
Buri adat ya buri bala jaise ,
Sache khwab se man me parinde udhte hai ,
Joothe khwab sirf din me jugnoo dikhate hai ,
Pehchane na jane tak dono sapney hi apne lagte hai ...


Yun to sapney jab toot te hai khud ko behlane ki wajah nehi milti ,
Par jhoothe sapnon se jab parda uth ta hai
Toh khud ko chhupane ki jagah nehi milti ....


Rang-berangee si sapney ,
Meethe-namkeen si sapney ,
Apne-begane se sapney ,
Jaane-anjane se sapney ,
Kisi bhi nagme ki dekho sapney ,
Apne aapko milao sapnon ki taal se ,
Bas door raho us milawati sapnon se ,
Jo lage to achhe par ho jhooth se saje .....








Monday, July 2, 2012

Tere sath Tere Bageir .. तेरे साथ तेरे बगैर


आज तक मिला नही यह जवाब ,
किस्से खुश हूँ मैं ?
तेरे साथ या  तेरे बगैर !


अभी भी तुझे छुप छुप के देखने की आदात गयी नहीं ,
कोई पीछे से थपकिया दे  तो 
मुझे लगता है यह तेरी शरारत तो नहीं है !
                                                                             
चाँद की ठंडक जब तेरे सपनों में लेके जाती है ,
सुबह की लाली जब मेरी नींदें उड़ाती है ,
तब तेरे ख्यालों में खुद से ही बातें किया करती हूँ 
काग़ज़ पर तेरी तसवीरें जैसी बनाती रहती हूँ ,
ताकि तेरा तराना महसूस कर पाऊँ हरदम ,
चाहे हो तेरे साथ या  तेरे बगैर .


तेरे एक एक बातें सोचकर अकेले में ही हंसती रहती हूँ ,
हंस हंस के कब आँखें भर आती है जान भी  ना   पाती हूँ 
क्या हो रहा है यह ! क्यूँ हो रहा है यह !
नहीं पता मुझे इसके आगे की  दास्ताँ ,
आखरी पन्ना कैसे लिखू !
तेरे साथ या  तेरे बगैर !!!!







Aaj tak mila nehi yeh jawab ,
Kisse khush hoon main ?
Tere sath ya tere begair !

Abhi bhi tujhe chhup chhup ke dekhne ki adaat gayi nehin ,
Koi peechhe se thapkiya de toh
Mujhe lagta hai yeh teri shararat to nehin hai !

Chand ki thandak jab tere sapnon me lekar jaati hai ,
Subah ki laali jab meri neendein udhati hai ,
Tab tere khyalon me khud se hi baatein kiya karti hoon ,
Kagaaz par tere tasveerein jaisi banati rehti hoon ,
Taa ki tera tarana mehsoos kar paun hardam ,
Chahe ho tere sath ya tere begair .

Teri ek ek baatein sochkar akele me hi hansti rehti hoon ,
Hans hans ke kab aankhein bhar aati hai jaan bhi na paati hoon !
Kya ho raha hai yeh ! kyun ho raha hai yeh !
Nehin pata mujhe iske aagey ki dastaan ,
Aakhri  panna kaise likhu !
Tere sath ya tere begair !!!


Wednesday, June 20, 2012




वोह मेरे ख्यालों में एकदम अनजाना सा है ,

उन्हें लेकर मेरी सोच ख़तम नहीं होती ,

वोह मेरे लिए एक गहरा सागर सा है ,

जिसमे समाके मैं उठाती हूँ सुनहरी मोती ,

कभी वोह ध्यान से लीन पर्वत समान लगते है ,

तब क्या मनमोहक उनकी माया , उनकी छाया ,

उन्हें भूल नहीं पातें , भूल नहीं सकते ,

अगर वोह मेरे पास हो ,

तो जीवन में जीने की आंस हो ,

सारी दुनिया मानो अपनी मुठी में हो ,

सपने में देखूं , अतीत , वर्तमान , भविष्य -

इन तीनों में वोह साथ है ,

जिसे प्रेम की लगन लागी ,

वोह तो प्रीत के गीत ही गाएगी ...










Woh mere khayalon me ekdum anjana sa hai ,
Unhein lekar meri soch khatam nehin hoti ,
Woh mere liye ek gehra sagaar sa hai ,
Jisme samake main uthati hoon sunehri moti ,
Kabhi woh dhyan se leen parvat saman lagte hai ,
Tab kya manmohak unki maya , unki chhaya ,
Unhein bhool nehin paate , bhool nehin sakte ,
Agar woh mere paas ho
Toh jeevan me jeene ki aans ho ,
Sari duniya mano apni muthi me ho ,
Sapney me dekhoon , ateet , vartamaan , bhavishya –
In teenon me woh saath hai ,
Jise prem ki lagan laagi ,
Woh toh preet ke geet hi gaayegi ….

Thursday, June 14, 2012




आसमान में कितने परिंदे उढ़ते है ,


आसमान का नज़ारा मनभावक हो उठते है ,


क्या हुआ अगर उनमे से


किसीका पंख टूट गया तोह !


इसके मतलब वोह आसमान के तरफ


देखना छोड़ तो नहीं दिया .....






सीख लो यह सीख ,


गिरो , मगर फिर से उठना सीखो ,


माना यह मुश्किल है ,


पर नामुमकिन बिलकुल नहीं है ,


बुलंद है जिनके हौसलें ,


वोह तैर कर लेते है हर फासलें .....








Asman me kitne parindey udhte hai ,
Asman ka nazara man-bhawak ho uthte hai ,
Kya hua agar unme se
Kisi ka pankh toot gaya toh !
Iske matlab woh asman ke taraf
Dekhna chhod to nehin diya …






Sikh lo yeh sikh ,
Giro , magar phir se uthna sikho ,
Mana yeh mushkil hai ,
Par naamumkin bilkul nehi hai ,
Buland hai jinke hauslein ,
Woh tair kar lete hai har faanslein …

Tuesday, June 5, 2012

Yehi hoon main येही हूँ मैं








नज़रअंदाज़ कभी नही किया ,
हमेशा की अपनी मंजिल की परवा ,
मगर ना जाने क्यूँ यह एहसास हुआ ,
के पत्थर   जमा करते करते 
मैंने सोना गवा दिया !!!!


आखिर में फिर से मन को  मना लिया  ,
इस बार रुकुंगी नहीं मैं .
मेरी इस दुनिया में सूनी नहीं हूँ मैं ,
चिलचिलाती धुप में निखरी सोना हूँ मैं ,
मेरी पहचान हूँ मैं ,
अपनी मंजिल से वाकिफ हूँ मैं ,
नाम की लालची नहीं ,
काम से  धनी हूँ मैं ....






Nazarandaaz kabhi nehi kiya ,
Hamesha ki apni manzil ki parwa ,
Magar na jane kyun yeh ehsaas hua ,
Ke pathar jama karte karte 
Maine sona gawa diya !!!!


Akhir me phir se man ko mana liya ,
Is bar rookungi nehin main ,
Meri is duniya me sooni nehin hoon main ,
Chilchilati dhoop me nikhri sona hoon main ,
Meri pehchan hoon main ,
Apni manzil se waqif hoon main ,
Naam ki lalchi nehi
Kaam se dhani hoon main ...

Friday, May 25, 2012

एक लड़की एक नए शहर में

वैसे तो जब कुछ लिखने की सोचती हूँ तो दिमाग में बोहत से बातें आती है की क्या छोड़ कर क्या लिखू ! लेकिन जब कलम हाथ में लेती हूँ तो पहले दिमाग चुप , और एक या दो लाइन लड़खड़ाते हुए लिखने के बाद कलम के  भी चुप होने की  नौबत आ जाते है ....

मेरी इस  Article के  title से लग रहा होगा मैं कोई नई शहर के बारे में नई कहानी लिखने वाली हूँ . पर सच तो यह है मुझे अभी तक नही पता के क्या लिखने वाली हूँ , या फिर लिखने के बाद वोह पढने लायेक रहेगा भी या नहीं ! चलिए शुरुआत करने की कोशिश करती हूँ ....


एक शहर और उसके कुछ ऐसी बातें जो सिर्फ   history या geography के किताब में सीमित नहीं है , जिस शहर की कहानी में एक नयापन हो ... अब ऐसा शहर और ऐसी एक कहानी कहाँ से लाऊँ ! ऐसा नही के मैंने पहले कोई नया शहर नही देखा ! या फिर  मैं कोई नई शहर में  घुमने नही गयी  !

सच कहूं , जब भी मैं कहीं घुमने जाती हूँ तो अपने बैग में जगह हो या  ना  हो एक बड़ा सा diary ज़रूर लेती हूँ ताकि जहाँ जा रही हूँ वहा के सारे ख़ूबसूरत यादें  लिख पाऊँ . पर अफ़सोस हर बार मेरी diary के खाली पन्ने मेरे साथ सैर करके वापस आ जाते है . ऐसा नही है के मुझे समय नहीं मिलती थी या लिखने की इच्छा नही होती थी या अछि यादें समेटने के लिए नहीं होते थे ! सब मजूद रहते थे पर कैसे लिखू और क्या लिखू इसी सवाल में अटकी रहती थी ....

अब ऐसा एक शहर जिसके कितने रंग , कितनी कहानी . कोई छोटी  सी गली जब बड़े रास्तें से मिलते है बिलकुल उसी तरह शहर में रहने वाले या आने वाले सब अपने अपने मंजिल की ओढ़ छोटे छोटे कदम बढ़ाते है . उनमे से कितने अपनी मंजिल ढून्ढ पाते है या कितने वापस लौट जाते है यह हिसाब मेरे पास नही है , बस लोगों के भगा-दौड़ी से पता चलता है शहर की रफ़्तार चल रहे है ....


यहाँ भीड़ में भी कभी कभी तनहा लगता है , तो कभी तन्हाई से पीछा छुड़ाने के लिए भीड़ में मिल जाते है . शोर ज्यादा है यहाँ पर अब तो इसी की आदत  डालनी पड़ेगी . सुबह से दोपहर , फिर शाम , उसके बाद रात , और रात से फिर सुबह तक के सफ़र में यह शहर कितने करवटें बदलते है ! फिर भी यहाँ के लोग शिकायत करते है -  "कुछ नही बदलने वाला , क्या होगा इस शहर का !" . हाँ , अब तो यह शहर ही जाने आगे क्या होगा !

मैं किसी एक शहर की बात नही कर रही हूँ . लगभग हर शहर की येही दास्तान है  . अगर ऐसा सोचा जाए  ऐसी ही किसी एक शहर में पहली बार कोई लड़की जब पहला कदम रखे और कोशिश करे उस शहर और उसके ज़िन्दगानी के साथ खुद की ताल-मेल बिठाने की तो !

नहीं उसमे कोई  नई बात नही है . कितने शहर है जहाँ कितनी  सारी  लड़कियां पहली बार आती है और येही की होकर रह जाती है . फिर धीरे धीरे येही नया शहर उसकी पुराने दोस्त जैसे बन जाते है .

नयापन तो तब होगा जब उस नए शहर में  कोई नया साथी मिल जाए .  कोई अजनबी की तरह या कोई बिन बुलाए मेहमान की तरह जिसके आने की उम्मीद नही था लेकिन ना जाने कहाँ से आ गया ! फिर कब वोह साथी दोस्त , हमराही , हमदर्द , अछे दोस्त , बोहत अछे दोस्त या फिर सिर्फ दोस्त बन जाए ! अगर वोही वजह बन जाए उस नए शहर में रहने की ! 


वोह दोस्त जो शहर की भीड़ में जब वोह लड़की उलझ जाए तो हाथ पकडके उसे भीड़ से रास्ता निकलकर ले जाए . वो दोस्त जो अकेलेपन दूर करने के लिए चाय पीने में साथ दे . वो दोस्त जो पास ना  होकर भी ख़ास लगे . बारिश की बूंदे जब गालो को छू जाए तो एहसास हो उस दोस्त को भी तो बारिश पसंद है !  और फिर बरसात में पकोड़े और समोसे खाने का स्वाद ही उसके साथ दुगना हो जाए .... 

सुबह आँख खुलते ही पहला ख्याल आए आज कब फ़ोन करेगा वोह ! फ़ोन करेगा ना ! और दोपहर होने से पहले ही जनाब के जब  फ़ोन आ जाए मन कहे 'इसे कहते है इंतज़ार का फल मीठा होता है' , फिर अचानक याद आ जाए 'कहाँ इंतज़ार करवाया ! कल रात को ही तो फ़ोन किया था !'. 

उसके बारे में सोचकर   बिना वजह कहीं भी हंसी आ जाए , तो कभी भी कोई बहाना बनाकर उस दोस्त से बात करने को मन चाहे . उसके नापसंद में भी अपनी  पसंद मिलाने की कोशिश करती जाए यह लड़की . उसके साथ लहरों की पानी में पेढ़ भिगोने का मज़ा ही कुछ और आए .

हां  एक और अजीब बात , अब उसकी   diary का पन्ना खाली नही रहती ,  क्योकि उस लड़की को अपने यादो  का पता मिल गई है ....


तो यह थी एक लड़की की नए शहर की कहानी . अब यह सच  है या सपना ! पर एक बात तो तय है के इस नए शहर में एक लड़की को जिस नएपन की तलाश थी वो येही है और कहीं  नही .........    
   

















Thursday, May 10, 2012

Maa Main Aau ! माँ मैं आऊ !





Maa , tujhe pata hai na main aa rehi hoon ,

To tu kyun na khush laage !

Mere aane ki intezaar me tune kitni aans lagayi ,

Jab aayi mere aane ki baari ,

Tab kyun tere chehre pe pareshani dikhey !


Kya yeh log mujhe aane nehi denge !

Chheen lenge mujhe tere godh me aane se pehle !

Agar aisa hai toh un sabsey poochh meri kya kasoor ?

Jo maut ke paigam liye mere peechhe bhage !


Mujhe apni aanchal se dhakle Maa ,

Bancha le teri beti ko duniya ki buri nazar se ,

Jiska saamna nehin kiya abhi tak ,

Kaise ladu uske aagei !


Tujhe ek sachi baat bataun Maa ,

Tere kokh me palhe andhere se bhi

bahar ki ujaale se darr laage ......




माँ , तुझे पता है न मैं आ रही हूँ ,

तो तू क्यूँ ना खुश लागे !

मेरे आने की इंतज़ार में तुने कितनी आस लगाइ  ,

जब आई मेरे आने की बारी ,

तब क्यूँ तेरे चेहरे पे परेशानी दिखे !


क्या यह लोग मुझे आने नही देंगे !

छीन लेंगे मुझे तेरे गोद में आने से पहले !

अगर ऐसा है तो उन सबसे पूछ मेरी क्या कसूर ? 

जो मौत के पैगाम लिए मेरे पीछे भागे !


मुझे अपनी आँचल  से ढकले माँ ,

बचा  ले तेरी बेटी को दुनिया की बुरी नज़र से ,

जिसका सामना नही किया अभी तक ,

कैसे लडू उसके आगे !


तुझे एक सच्ची बात बताऊ  माँ ,

तेरे कोख में पले अँधेरे से भी 

बाहार की उजाले से डर लागे ......